वो कहता है उसे
घर में तो बैठी हो तुम
तुम्हे क्या पता
बाहर की परेशानियाँ......
ट्रॅफिक भरी सुबहे, बॉस के ताने
और थकानभरी शामें
चाहा तो उसने
बहुत कुछ बोले
आखिर अपनी कैफियत
वो और किसे सुनाये
लेकिन,ओठां को दातों से दबाकर
मन में वो बोली .......
ऐं बाहर जाने वाले
तुझे क्या पता घर में है
कितनी चुनौतिया.......
फिर भी इन से
हारती नही है वो
और शाम को उसके घर आने के बाद
प्यार से मुस्कुराती है वो......
चुनौतियो से लड़कर
बची हुयी जान के साथ उस पे
बेपनाह प्यार लुटाती है वो.....
और ..........
फिर भी उसे लगता है
सिर्फ घर में बैठी ही
तो है वो..........
रजनी✍️

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